उपालम्भ काव्य
प्राचीन काव्याचार्यों के मतानुसार उपालम्भ काव्य मुख्यतः शृंगारकाव्य का एक भेद, जिसमें नायिका की विश्वस्त सखी उपालम्भ (उलाहना) देकर नायक को नायिका के अनुकूल करती है। लेकिन सर्वत्र सखी द्वारा ही नायिका नायक को उपालंभपूर्ण संदेश नहीं देती, बल्कि संयोग शृंगार में नायिका स्वयं ही नायक को उपालंभ देती है। कहीं-कहीं नायिका, पक्षी, मेघ अथवा पवन द्वारा भी नायक को उपालंभ भेजती है। ऐसा प्राय: वियोग शृंगार में देख पड़ता है।
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