शास्त्रीय संगीत

भारतीय शास्त्रीय संगीत या मार्ग, भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है। शास्त्रीय संगीत को ही ‘क्लासिकल म्यूजिक भी कहते हैं। शास्त्रीय गायन सुर-प्रधान होता है, शब्द-प्रधान नहीं। इसमें महत्व सुर का होता है । इसको जहाँ शास्त्रीय संगीत-ध्वनि विषयक साधना के अभ्यस्त कान ही समझ सकते हैं, अनभ्यस्त कान भी शब्दों का अर्थ जानने मात्र से देशी गानों या लोकगीत का सुख ले सकते हैं। इससे अनेक लोग स्वाभाविक ही ऊब भी जाते हैं पर इसके ऊबने का कारण उस संगीतज्ञ की कमजोरी नहीं, लोगों में जानकारी की कमी है।
सोहर
सोहर घर में सन्तान होने पर गाया जाने वाला मंगल गीत है। इसको संतान के जन्म और उससे संबंधित अवसरों जैसे
प्रतिमा
'प्रतिमा' शब्द देवविशेष, व्यक्तिविशेष अथवा पदार्थविशेष की प्रतिकृति, बिंब, मूर्ति अथवा आकृति सभी
ललित कला
सौंदर्य या लालित्य के आश्रय से व्यक्त होने वाली कलाएँ ललित कला कहलाती हैं। अर्थात् वह कला जिसके अभिव्यंजन
भारत भारती (काव्यकृति)
भारत भारती, मैथिलीशरण गुप्तजी की प्रसिद्ध काव्यकृति है जो १९१२-१३ में लिखी गई थी। यह स्वदेश-प्रेम
उदयशंकर भट्ट
उदयशंकर भट्ट हिंदी के विद्वान सुप्रसिद्ध लेखक व कवि थे
कात्यायन (विश्वामित्रवंशीय)
विश्वामित्रवंशीय कात्यायन मुनि ने कात्यायन श्रोतसूत्र, कात्यायन गृह्यसूत्र और प्रतिहारसूत्र
मूर्ति
भारतीय कला और संस्कृति के सन्दर्भ में किसी भी प्रकार के रूप, प्रतिमा (idol) या ठोस वस्तु को मूर्ति कहते
रमणलाल वसंतलाल देसाई
रमणलाल वसंतलाल देसाई गुजराती भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार थे। उन्हें गुजराती साहित्य का "युगमूर्ति
होला मोहल्ला
सिक्खों के पवित्र धर्मस्थान श्री आनन्दपुर साहिब मे होली के अगले दिन से लगने वाले मेले को होला मोहल्ला
आनन्द दिघे
आनन्द दिघे, शिव सेना के ठाणे जिले के एक वरिष्ट नेता थे