संख्या

संख्याएँ वे गणितीय वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग मापने, गिनने और नामकरण करने के लिए किया जाता है। १, २, ३, ४ आदि प्राकृतिक संख्याएँ इसकी सबसे मूलभूत उदाहरण हैं। इसके अलावा वास्तविक संख्याएँ और अन्य प्रकार की संख्याएँ भी आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में प्रयुक्त होतीं हैं। संख्याएँ हमारे जीवन के ढर्रे को निर्धरित करती हैं। केल्विन ने संख्याओं के बारे में कहा है कि आप किसी परिघटना के बारे में कुछ नहीं जानते यदि आप उसे संख्याओं के द्वारा अभिव्यक्त नहीं कर सकते।
दशमलव पद्धति
दशमलव पद्धति या दाशमिक संख्या पद्धति या दशाधार संख्या पद्धति वह संख्या पद्धति है जिसमें गिनती
स्कैंडिनेवियाई भाषाएँ
अगर भारतीय भाषाओं के बारे में यह कहा जाता है कि वह भारोपीय भाषापरिवार के दक्षिणपूर्वी भाग में उत्पन्न
समुच्चय सिद्धान्त
समुच्चय सिद्धान्त, गणित की एक शाखा है जो समुच्चयों का अध्ययन करती है। वस्तुओं के सुपरिभाषित संग्रह
आंग्ल-नॉरमन साहित्य
रोमन विजय के बहुत पहले आर्यों के कुछ प्रारंभिक कबीले इंग्लैंड के दक्षिण एवं दक्षिण पश्चिम भागों
व्यतिकरण (तरंगों का)
व्यतिकरण (Interference) से किसी भी प्रकार की तरंगों की एक दूसरे पर पारस्परिक प्रक्रिया की अभिव्यक्ति होती
परजीविजन्य रोग
प्राणिजगत्‌ के अनेक जीवाणु मानव शरीर में प्रविष्ट हो उसमें वास करते हुए उसे हानि पहुँचाते, या रोग
दृष्टकूट
दृष्टकूट ऐसी कविता को कहते हैं जिसका अर्थ केवल शब्दों के वाचकार्थ से न समझा जा सके बल्कि प्रसंग
विज्ञान भारती
विज्ञान भारती, भारत की एक अशासकीय संस्था है जो भारत में स्वदेशी विज्ञान के विकास के लिए एक जीवंत आंदोलन
बूलीय बीजगणित (तर्कशास्त्र)
बूलीय बीजगणित या बूली का तर्कशास्त्र, तार्किक ऑपरेशन का एक सम्पूर्ण तन्त्र है। इसे सबसे पहले जॉज
आनन्द दिघे
आनन्द दिघे, शिव सेना के ठाणे जिले के एक वरिष्ट नेता थे