2011 Top Ten of Conflict for Mathematics

तर्कशास्त्र का इतिहास
अनेकों संस्कृतियों ने तर्क करने की सूक्ष्मतिसूक्ष्म प्रणाली अपनायी तथा मानव के सम्पूर्ण चिन्तन में तर्क उपस्थित रहा है। किन्तु तर्क करने की स्पष्ट और विधिवत प्रणाली मुख्यत: और मूलत: भारत, चीन
त्रिकोणमिति के उपयोग
त्रिकोणमिति के अनेक उपयोग होते हैं। पाठ्यपुस्तकों में भूमि सर्वेक्षण, जहाजरानी, भवन आदि का ही प्राय: उल्लेख किया गया होता है। इसके अलावा यह गणित, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आदि शैक्षिक क्षेत्रों
जगन्नाथ सम्राट
त्रिभुज
त्रिभुज (Triangle), तीन शीर्षों और तीन भुजाओं (side) वाला एक बहुभुज (Polygon) होता है। यह ज्यामिति की मूल आकृतियों में से एक है। शीर्षों A, B, और C वाले त्रिभुज को लिखा/कहा जाता है। यूक्लिडियन ज्यामिति में कोई भी तीन असंरेखीय
आयत
ऐसा चतुर्भुज जिसके चारों अन्तःकोण समकोण हों उसे आयत (Rectangle) कहते हैं। आयत एक ऐसा चतुर्भुज है जिसकी आमने सामने की भुजाएं समांतर होती है, "आयत" कहलाता है
अक्षांश रेखाएँ
भूगोल में किसी स्थान की स्थिति को बताने के लिए उस स्थान का अक्षांश (latitude) तथा देशांतर (longitude) बताया जाता है। किसी स्थान का अक्षांश, धरातल पर उस स्थान की 'उत्तर-दक्षिण स्थिति' को बताता है। उत्तरी और
घटाना
जोड़ने की प्रक्रिया के विरुद्ध प्रक्रिया को घटाना कहा जाता है। जब किसी संख्या अथवा अंक से किसी दूसरी संख्या या अंक को कम किया जाता है तो उसे घटाना कहा जाता है। घटाने को - चिह्न से प्रदर्शित किया
अनंत
अनंत (Infinity) का अर्थ होता है जिसका कोई अंत न हो। इसको ∞ से निरूपित करते हैं। यह गणित और दर्शन में एक कांसेप्ट है जो ऐसी राशि को कहते हैं जिसकी कोई सीमा न हो या अन्त न हो। भूतकाल में लोगों ने अनन्त के बारे
अंक
अंक ऐसे चिह्न हैं जो संख्याओं के लिखने के काम आते हैं। दासमिक पद्धति में शून्य से लेकर नौ तक कुल दस अंक प्रयोग किये जाते हैं। इसी प्रकार षोडश आधारी में शून्य से लेकर ९ तक एवं A से लेकर F कुल १६ अंक
पिङ्गल
पिंगल राव कुल में जन्मे भारत के प्राचीन गणितज्ञ और छन्दःसूत्रम् के रचयिता। इनका काल ४०० ईपू से २०० ईपू अनुमानित है। जनश्रुति के अनुसार यह पाणिनि के अनुज थे। छन्द:सूत्र में मेरु प्रस्तार, द्विआधारी