2012 Top Ten of Polemic for Philosophy

भारत में ब्रिटिश काल में भ्रष्टाचार
अंग्रेजों ने भारत के राजा महराजाओं को भ्रष्ट करके भारत को गुलाम बनाया। उसके बाद उन्होने योजनाबद्ध तरीके से भारत में भ्रष्टाचार को बढावा दिया और भ्रष्टाचार को गुलाम बनाये रखने के प्रभावी हथियार
अनुभव
प्रयोग अथवा परीक्षा द्वारा प्राप्त ज्ञान अनुभव कहलाता है। प्रत्यक्ष ज्ञान अथवा बोध। स्मृति (याददास्त) से भिन्न ज्ञान। तर्कसंग्रह के अनुसार ज्ञान के दो भेद हैं - स्मृति और अनुभव। संस्कार मात्र
अहिंसा
अहिंसा का सामान्य अर्थ है हत्या न करना'या पर दंड ना देना ऐसा बिल्कुल नहीं होता । इसका व्यापक अर्थ है - किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुँचाना। मन में किसी का अहित न सोचना
परहितवाद
परहितवाद (altruism) दूसरों की भलाई के लिए जीने का दर्शन है। इसे 'परार्थपरता', 'परहितपरता', 'परार्थवाद', 'परार्थपरता', परायणता, 'निःस्वार्थता', 'परोपकारिता', 'आत्मोत्सर्ग' आदि भी कहते हैं। नींद में नींद और सपने
प्रत्यक्ष
भारतीय दर्शन के सन्दर्भ में, प्रत्यक्ष, तीन प्रमुख प्रमाणों में से एक है। यह प्रमाण सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। 'प्रत्यक्ष' का शाब्दिक अर्थ है- वह वस्तु जो आँखों के सामने हो। यहाँ 'आँख' से तात्पर्य सभी
संघवाद
संघवाद सरकार की एक प्रणाली है जिसमें सत्ता केंद्रीय प्राधिकरण और देश की विभिन्न घटक इकाइयों के बीच विभाजित होती है। एक संघ में सरकार के दो स्तर होते हैं:एक है पूरे देश की सरकार जो सामान्य
कुन्फ़्यूशियसी धर्म
कनफ़ूशीवाद या कुन्फ़्यूशियसी धर्म ईसा पूर्व 5वीं शताब्दी में शुरू हुआ चीन का एक प्राचीन दर्शन और विचारधारा है। इसके प्रवर्तक थे चीनी दार्शनिक कुन्फ़्यूशियस, जिनका जन्म 551 ई.पू. माना जाता है। ये धार्मिक
सरमती लोग
सरमती लोग प्राचीनकाल में दक्षिणी रूस, युक्रेन और बाल्कन प्रदेश में बसने वाली एक जाति थी। सरमती ईरानी भाषाएँ बोलते थे और इस क्षेत्र में इनका प्रभाव पाँचवी शताब्दी ईसापूर्व से चौथी शताब्दी ईसवी
कणाद
कणाद एक ऋषि थे। वायुपुराण में उनका जन्म स्थान प्रभास पाटण बताया है। स्वतंत्र भौतिक विज्ञानवादी दर्शन प्रकार के आत्मदर्शन के विचारों का सबसे पहले महर्षि कणाद ने सूत्र रूप में लिखा। ये "उच्छवृत्ति
उदारतावाद
उदारवाद (Liberalism) वह विचारधारा है जिसके अंतर्गत मनुष्य को विवेकशील प्राणी मानते हुए सामाजिक संस्थाओं को मनुष्यों की सूझबूझ और सामूहिक प्रयास का परिणाम समझा जाता है। उदारवाद की उतपति को 17वी शताब्दी